BhaktiVed
कृष्ण

वृंदावन मोरली वागे छे

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

वागे छे रे वागे छे, वृंदावन मोरली वागे छे तेनो शब्द गगनमां गाजे छे. टेक.

वृंदा ते वनने मारग जातां, वा’लो दाण दधिनां मागे छे. वृं०

वृंदा ते वनमां रास रच्यो छे, वा’लो रासमंडळमां बिराजे छे. वृं०

पीळां पीतांबर जरकसी जामा, हाथे पीळो पटको बिराजे छे. वृं०

काने ते कुंडळ माथे मुगट ने, मुख पर मोरली बिराजे छे. वृं०

वृंदा ते वननी कुंजगलीनमां, वा’लो थनक थै थै नाचे छे. वृं०

बाई मीरां के प्रभु गिरधर नागर, दर्शनथी दुःखडां भांगे छे. वृं०

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