BhaktiVed
कृष्ण

दरस बिन दूखण लागे नैन

भजनरचना: मीराबाई (Meera Bai)

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दरस बिन दूखण लागे नैन।

जब से तुम बिछुड़े प्रभु मोरे, कबहुँ न पायो चैन।

दरस बिन दूखण लागे नैन।

सबद सुणत मेरी छतियाँ काँपै, मीठे मीठे बैन।

दरस बिन दूखण लागे नैन।

बिरह कथा कासूँ कहूँ सजनी, बह गई करवत ऐन।

दरस बिन दूखण लागे नैन।

कल न परत पल हरि मग जोवत, भई छमासी रैन।

दरस बिन दूखण लागे नैन।

मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे, दुख मेटण सुख दैन।

दरस बिन दूखण लागे नैन।

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स्रोत: Meera Bai pad; standard Meera Padavali text as commonly sung

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