BhaktiVed
कृष्ण

म्हारा रे गिरिधर गोपाल दूसरा ण कोई

भजनरचना: मीराबाई (Meera Bai)

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म्हारा रे गिरिधर गोपाल, दूसरा ण कोई।

दूसरा ण कोई साधाँ, सकल लोक जोई॥

भाई छाँड्या बन्धा छाँड्या, छाँड्या सगा सोई।

साधाँ संग बैठ बैठ, लोक लाज खोई॥

भगत देख राजी ह्याँ, जगत देख रोई।

दासी मीरा लाल गिरिधर, तारो अब मोही॥

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स्रोत: Meera Bai pad (Rajasthani variant of Mere to Giridhar Gopal); standard Meera Padavali text

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