BhaktiVed
Mata / Devi

Durge Durghat Bhari (devichi Aarti)

AartiAuthor: समर्थ रामदास (attributed)Marathi Devi aarti; Navratri

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दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी।

अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी॥

वारी वारी जन्ममरणाते वारी।

हारी पडलो आता संकट निवारी॥

जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथिनी।

सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥

जय देवी जय देवी।

त्रिभुवनभुवनी पाहता तुजऐसी नाही।

चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही॥

साही विवाद करिता पडले प्रवाही।

ते तू भक्तालागी पावसि लवलाही॥

जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथिनी।

सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥

जय देवी जय देवी।

प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा।

क्लेशापासुनि सोडवी तोडी भवपाशा॥

अंबे तुजवाचून कोण पुरवील आशा।

नरहरि तल्लीन झाला पदपंकजलेशा॥

जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथिनी।

सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥

जय देवी जय देवी।

Source: Traditional Marathi Devi aarti; Marathi aarti sangrah text