BhaktiVed
Ganesh

Sukhkarta Duhkhharta (ganapti Aarti)

AartiAuthor: समर्थ रामदास (Samarth Ramdas)Marathi Ganpati aarti; Ganeshotsav

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सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।

नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥

सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।

कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥

जय देव जय देव।

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।

चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा॥

हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।

रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥

जय देव जय देव।

लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना।

सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना॥

दास रामाचा वाट पाहे सदना।

संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।

दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥

जय देव जय देव।

Source: Samarth Ramdas, Ganpati aarti; text as printed in Marathi aarti sangrah and sung at every Ganeshotsav