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साईं

आरती साईबाबा (सौख्यदातार जीवा)

आरतीरचना: माधव अडकर (Madhav Adkar)Shirdi evening (sandhya) aarti; sung Thursday
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आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा।

चरणरजातली, द्यावा दासां विसावा, भक्तां विसावा॥

आरती साईबाबा।

जाळुनियां अनंग, स्वस्वरूपीं राहे दंग।

मुमुक्षु जनां दावी, निज डोळां श्रीरंग, डोळां श्रीरंग॥

आरती साईबाबा।

जया मनीं जैसा भाव, तया तैसा अनुभव।

दाविसी दयाघना, ऐसी तुझी ही माव, तुझी ही माव॥

आरती साईबाबा।

तुमचें नाम ध्यातां, हरे संसृति व्यथा।

अगाध तव करणी, मार्ग दाविसी अनाथा, दाविसी अनाथा॥

आरती साईबाबा।

कलियुगीं अवतार, सगुण ब्रह्म साचार।

अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर, दत्त दिगंबर॥

आरती साईबाबा।

आठां दिवसां गुरुवारीं, भक्त करिती वारी।

प्रभुपद पहावया, भवभय निवारी, भय निवारी॥

आरती साईबाबा।

माझा निजद्रव्य ठेवा, तव चरणरज सेवा।

मागणें हेंचि आतां, तुम्हां देवाधिदेवा, देवाधिदेवा॥

आरती साईबाबा।

इच्छित दीन चातक, निर्मल तोय निज सुख।

पाजावें माधवा या, सांभाळ आपुली भाक, आपुली भाक॥

आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा।

चरणरजातली, द्यावा दासां विसावा, भक्तां विसावा॥

आरती साईबाबा।