BhaktiVed
ॐ

Aavyo Mas Vasant Vadhamnan

BhajanAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

आव्यो मास वसंत वधामणां

आव्यो मास वसंत वधामणां, छबीलाजीने करीए छांटणा;

वन केसर फूल्यो अति घणो, तहां कोकिला शब्द सोहामणां;

रूडी अरतना लइए भामणा, आव्यो मास वसंत वधामणां …. १

तुं तो वहेली था ने आज रे, तारां सरसे सारां काज रे;

तुं तो मुक हैयानी दाझ रे, आव्यो मास वसंत वधामणां ……… २

तुं तो नवरंग चोळी पहेर रे, पछी आज थाशे तारो ल्हेर रे;

रूडा हरजी आव्या तारे घेर रे, आव्यो मास वसंत वधामणां …. ३

तुं तो सज शणगार साहेलडी, लेने अबिल गुलाल खोला भरी;

पछी ओ आवे हसतां हरि, आव्यो मास वसंत वधामणां …….. ४

रूडी अरतना अंगो अंग छे, तहां रमवानो रूडो रंग छे;

तहां छबीलाजीनो संग छे, आव्यो मास वसंत वधामणां ……… ५

तहां आनंद सरखो थाय छे, तहां मोहन मोरली वाये छे;

तहां नरसैंयो गुण गाय छे, आव्यो मास वसंत वधामणां …….. ६

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