BhaktiVed
ॐ

Bal Men Vairagan Hungi

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

बाल में वैरागण हूंगी

बाल में वैरागण हूंगी.

जिन भेषा म्हारो साहिब रीझे, सो ही भेष धरुंगी.

शील संतोष धरुं घट भीतर, समतां पकड रहूंगी,

जाको नाम निरंजन कहिये, ताको ध्यान धरुंगी.

गुरु के ग्यान रंगूं तन कपडां, मन मुद्रा पहेरुंगी,

प्रेम-प्रीतसू हरिगुण गाउं, चरणन लिपट रहूंगी.

या तनकी मैं करुं कीगरी, रसना नाम कहूंगी,

मीरां के प्रभु गिरिधर नागर, साधू संग रहूंगी.

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