BhaktiVed
ॐ

बांह ग्रहे की लाज

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

बांह ग्रहे की लाज

अब तो निभायां पडेगा,

बांह ग्रहे की लाज.

समरथ शरण तुम्हारी सैयां,

सरब सुधारण काज.

भवसागर संसार अपरबल,

जामें तुम हो जहाज!

निरधारां आधार जगत-गुरु,

तुम बिन होय अकाज ... बांह ग्रहे

जुगजुग भीर हरी भगतन की,

दीनी मोक्ष समाज,

मीरां शरण ग्रही चरणन की,

लाज रखो मतराज ... बांह ग्रहे

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