BhaktiVed
ॐ

गुरगम खोजो रे आ घटमां

भजनरचना: ખીમ સાહેબ (Khim Saheb)

गुरगम खोजो रे आ घटमां

गुरगम खोजो रे आ घटमां वो घटमां...

गुरु गम खोजो रे आ घटमां, ओ घटमां

कर सतगर की सेव, और सब जूठी बाजी,

देख पतंग को रंग, ता ही पर दनिया राजी,

सत शबद सूझे नहीं, जूठ जूठ कं ध्याय ;

आपकी तो गम नाहीं रे, कहां से आया कहां जाय...गर गम खोजो रे... आ घटमां...

दूर देखन मत जाव, पकड सूरता की दोरी,

करो शबदसे मेळ, रहो तम कोई स्वर जोडी,

शबद पार हे साहेब, जो सतगर समजाई;

अक्षर आद अनादिका, अक्षरातित ओळखाई...गर गम खोजो रे... आ घटमां...

सहज शून्य के मांही, परम हंसा का वासा,

निराधार निरवाण, कबहं होवे ना नाशा,

करम भरम सब भांग के, कर सतगर की सेव;

सान समज ले सतगर की, अवर देव नहीं कोई....

बाजी सब हद मांही, बेहद किरतार कहावे,

अनहद उठे अपरंपार भाण गर भेद बतावे,

बाहिर भीतर एक तार हे, रमता राम कबीर;

खीम कहे छे खलक दरिया, सनमख साध्या तीर...गर गम खोजो रे... आ घटमां...

गुरृ गम खोजो रे... आ घटमां...

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें