BhaktiVed
कृष्ण

जाग्युं त्यारे झांझरनो झमकार

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

जाग्युं त्यारे झांझरनो झमकार

सखी तारां नेपुर रे, सुंदर वागतां रे, वाग्यां वाग्यां माझम रात;

नानुं सरखुं नगर रे, सूतेलुं जागियुं रे, जाग्युं त्यारे झांझरनो झमकार. सखी०

वाडीमां रे पाक्यो रे, सुंदर आंबलो रे, तेनी ते मीठी मीठी ऊतरे शाख,

कामिनी वेडावे रे, आरोगवा रे, मारा हरिने कहुं के चाख. सखी०

आंगणीये रोपावुं रे, सुंदर एलची रे, ठाम ठाम रोपावुं नागरवेल;

नरसैंयाना स्वामी रे, बाई मने त्यां मळ्यो रे, हरि मारो शोभे उरनी वेल. सखी०

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