BhaktiVed
ॐ

Ji Re Lakha, Eva Jo Sant Re Male

BhajanAuthor: લોયણ (Loyan)

जी रे लाखा, एवा जो संत रे मळे

जी रे लाखा, एवा जो संत रे मळे

तो एने धोडी धोडीने मळजो रे…

जी रे लाखा, हुं ने मारुं छे लोढाना कटका जी,

एने तमे काम वचनेथी भेळो रे,

जी रे लाखा, सास – उसासनी तमे धमणुं धखावो जी,

एने तमे ता’रे दइने तपावो जी,

जी रे लाखा, सतनी एरण पर तमे ठीक करी ठेरावो जी,

एने गिनान साणसीथी पकडावो रे,

जी रे लाखा, ता’रे आव्या रे विना तमे टाढुं मा टीपजो जी,

जीनजे माथे शबदुना घणने लगावो रे ,

जी रे लाखा, एक रे थिया पछी एना अलंकार बनावो जी,

एनुं ब्रह्म अस्त्र तो बनी जाशे रे,

जी रे लाखा, सतसंगनी सराणुं दइने सज्ज करी जोजो,

ज्यारे एनो जीव बुध्धि काट उखडी जावे रे,

जी रे लाखा, काट उखडे पछी काळ नंइ लोपे जी,

से’जे तमे वैकुंठमां जाशो रे,

जी रे लाखा, सेलरशीनी चेली सती लोयण बोल्यां जी,

त्यारे तमे पूरण ब्रह्म बनी जाशो जी,

तेजमां तेज मळी जाशो जी.

जी रे लाखा, एवा जो संत रे मळे

तो एने धोडी धोडीने मळजो रे…

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