BhaktiVed
ॐ

जीवण साहेबनी साखीओ

भजनरचना: દાસી જીવણ (Dasi Jivan)

दासी जीवण

जीवण साहेबनी साखीओ

वण अक्षरे अक्षर लख्या, वण लीये ली;

‘जीवण’ने गुरु भीम भेट्या, रातमांथी थयो दी.....(१)

सानकारे समज्या नहीं, कलेजे पड्यो न छेद;

‘जीवण’ कहे जोई चालजो, रे’शो ठेरना ठेर........(२)

मोटेरा मेघधारवो, ई कुळमां अवतार;

‘जीवण’ झाझुं शुं कहुं, समज्या नहीं गमार........(३)

जीवण जीवण जग कहे, जीवण हंस प्राण;

जेने नीरखतां नयणां ठरे, सदगुरुनी आण.........(४)

जग जुलाहे जीतीयो, सब संतन को शीश;

नाम बटाई ‘जीवणा’, जाकुं जैसी धीर.........(५)

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