BhaktiVed
ॐ

Jyan Lagi Lagyano Bhay

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

ज्यां लगी लाग्यानो भय

ज्यां लगी लाग्यानो भय रहे मनमां,

त्यां लगी भगति न थाय रे,

शरीर पडे वाको धड लडे,

सोई मरजीवा कहेवाय रे ... ज्यां लगी

पोतानुं शरीर माने नहीं मननुं,

शरीरना धणी मटी जाय रे,

सदगुरु चरणमां शीश नमावे

त्यारे पूरण निजारी कहेवाय रे ... ज्यां लगी

नवधा भक्तिमां नीर्मळ रहेवुं ने

मेली देवी मननी ताणाताण रे,

पक्षापक्षी नहीं हरि केरा देशमां

एनुं नाम ज पदनी ओळखाण रे ... ज्यां लगी

अटपटो खेल आ झटपट समजाय ना

ए तो जाणवा जेवी छे वात रे,

गंगा सती एम बोलिया पानबाई,

त्यारे मटी जाये साचे जात रे ... ज्यां लगी

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