BhaktiVed
ॐ

कळजुग आव्यो हवे कारमो

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)

कळजुग आव्यो हवे कारमो

कळजुग आव्यो हवे कारमो रे,

तमे सुणजो नर ने नार,

भक्ति धरम ते मांहे लोपाशे,

रहेशे नहि तेनी मर्याद .... कळजुग.

गुरुजीना कीधां चेलो नहीं माने

ने घेरघेर जगावशे ज्योत

नर ने नारी मळी एकांते बेसशे,

ने रहेशे नहि आत्म ओळखाण ... कळजुग.

विषयना वेपारमां गुरुजीने वामशे,

जूठां हशे नर ने नार,

आड धरमनी ओथ लेशे,

पण राखे नहि अलख ओळखाण ... कळजुग.

एक बीजाना अवगुण जोवाशे

ने करशे ताणवाण रे,

कजीया कलेशनी वृद्धि थाशे त्यारे,

नहि आवे धणी मारो द्वार .... कळजुग.

साचा मारा भईला अलख आराधे

ने धणी पधारे एने द्वार रे,

गंगा रे सती एम बोलियां रे,

तमे करजो साचानो संग ... कळजुग.

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