BhaktiVed
कृष्ण

कोई कहियो रे प्रभु आवनकी

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

कोई कहियो रे प्रभु आवनकी

कोइ कहियो रे प्रभु आवनकी,

आवनकी मनभावनकी.

आप न आवै लिख नहि भेजै,

बाण पडी ललचावनकी.

ए दो नैण कह्यो नहि माने,

नदियां बहै जैसे सावनकी.

कहा करुं! कुछ नहि बस मोरो,

पंख नहि उड जावनकी;

मींरा कहे प्रभु ! कबर मिलोगे !

चेरी भइ हुं तेरे दांवनकी.

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