BhaktiVed
ॐ

लाखा हां… लावो रे कूंची तो ताळां खोलिये

भजनरचना: લોયણ (Loyan)

लाखा हां… लावो रे कूंची तो ताळां खोलिये

ला खा…! हां… लावो… रे… कूंची… तो… ताळां… खोलिये…

कूंची मारा मेरम गुरु ने हाथ… ला खा… हां…

कूंचियु छे मालम गुरुजी ने हाथ… गुरुजी आवे तो ताळां उघडे…

ए… अबळा लोयण तमने एम भणे हो जी…

लाखा…! हां…! अम्मर आंबो आयां रोपियो, एनी पाळ्युं रे पोगी छे पियाळ, ला खा…

हे… शाखुं रे सरगापर पुगियुं, एनो वेडनहारो हुशियार… ला खा…

ए… अबळा लोयण तमने एम भणे हो जी…

लाखा...! हां…! ए… खुंदी रे खमे माता धरणी… अने वाढी रे खमे वनराई, ला खा…

हे… कठण वचन मारां साधुडां खमे, नीर तो सायरमां समाय… ला खा…

ए… अबळा लोयण तमने एम भणे हो जी…

लाखा...! हां…! ए… सूरज समो नहीं चांदलो, धरणी समो नहीं आभ, ला खा…

हे… गुरुजी समो नहीं चेलको, जेणे मूळगो गुमाव्यो छे लाभ… ला खा…

ए… अबळा लोयण तमने एम भणे हो जी…

लाखा...! हां…! दूधे रे भरी तलावडी, जेनी मोतीडे रे बांधेल पाळ… ला खा…

हे… सुगरा हशे ते एने चाखशे, नुगरा पियासा रे जाय… ला खा…

ए… अबळा लोयण तमने एम भणे हो जी…

लाखा...! हां…! काशी रे नगरना घाटमां, लख रे आवे ने लख जाय, ला खा…

हे… साधु रे जननो संदेशडो, खुलासे कह्यो नव जाय… ला खा…

ए… अबळा लोयण तमने एम भणे हो जी…

लाखा...! हां…! लाखो तो लाखुंमां म्हालतो, करतो हीरा हुंदा मूल, लाखा…

हे… करणी चूक्यो ने थियो कोढियो, ई तो थई ग्यो कोडीने तूल… ला खा…

ए… अबळा लोयण तमने एम भणे हो जी…

लाखा...! हां…! सोनुं रे जाणी ने सेवियो, करमे निवडियुं कथीर… ला खा…

हे… शेलणशीनी चेली लोयण बोलियां, गुरु आव्ये थाशो रे कंचनने तोल… ला खा…

ए… अबळा लोयण तमने एम भणे हो जी…

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