BhaktiVed
ॐ

Mohe Lagi Latak Guru Charnanki

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

गुरुमहिमानुं पद

राग मालकोस - तीन ताल

मोही लागी लटक गुरु चरननकी.

चरन बिना मुझे कछु नहि भावे, जूठ माया सब सपननकी.

भवसागर सब सूख गया हे, फिकर नहीं मुझे तरननकी,

मीरां कहे प्रभु गिरिधर नागर, उलट भई मोरे नयननकी.

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