BhaktiVed
ॐ

Navdha Bhaktiman Nirmal Rahevun

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

नवधा भक्तिमां निर्मळ रहेवुं

नवधा भक्तिमां निर्मळ रहेवुं

ने राखवो वचननो विश्वास रे

सतगुरुने पूछीने पगलां रे भरवां

ने थईने रहेवुं एना दास रे ... नवधा भक्तिमां

रंग ने रूपमां रमवुं नहीं

ने करवो भजननो अभ्यास रे,

सतगुरु संगे नीर्मळ रहेवुं

ने तजी देवी फळ केरी आश रे .... नवधा भक्तिमां

दाता ने भोक्ता हरि एम कहेवुं

ने राखवुं नीर्मळ ध्यान रे,

सतगुरु चरणमां शीश रे नमाववुं

ने धरवुं गुरुजीनुं ध्यान रे ... नवधा भक्तिमां

अभ्यासीने एवी रीते रहेवुं

ने जाणवो वचननो मरम रे

गंगा सती एम बोलिया पानबाई,

छोडी देवां अशुध्ध करम रे .. नवधा भक्तिमां

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