BhaktiVed
कृष्ण

राणाजी, तैं झहर दियो मैं जानी

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

राणाजी, तैं झहर दियो मैं जानी

राणाजी, तैं झहर दियो मैं जानी.

जब लग कंचन कसिये नाही,

होत ना बारा पानी;

लोकलाज कुल कान जगतकी,

बहाय दीनी जैसे पानी. ... राणाजी.

अपने घरका परदा कर ले,

मैं अबला बौरानी;

तरकस तीर लग्यो मेरे हियरे,

गरक गयो सनकानी ... राणाजी.

मीरां प्रभु के आगे नाची,

चरणकमल लपटानी ... राणाजी.

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