BhaktiVed
ॐ

संत पारस चंदन बावना

भजनरचना: પ્રીતમ (Pritam)

पद ५२ धोळ १४.

संत पारस चंदन बावना, कामधेनु कल्पतरु सार...

समागम संतनो.. १

संत समज्यामां अंतर घणो, तरु पारस त्रण प्रकार...

समागम संतनो.. २

एक पारसथी पारस बने, एक पारसथी हेम होय...

समागम संतनो.. ३

एक पारस लोहने कुंदन करे, सो वरसे लोह न होय...

समागम संतनो.. ४

एक चंदनथी विख ऊतरे, एक चंदनथी अग्नि ओलाय...

समागम संतनो.. ५

एक तलभार तात तेलमां, फरी तातुं तेल नव थाय...

समागम संतनो.. ६

सर्वे सेना शूरी नव जाणवी, सर्वे नारी पतिव्रता नो'य...

समागम संतनो.. ७

सर्वे गज शिर मोती नव नीपजे, वने वने अगर नव होय...

समागम संतनो.. ८

मृगे मृगे कस्तूरी मृगमद नव नीपजे, नागे नागे मणि नव होय...

समागम संतनो.. ९

जळे जळे कमळ नव नीपजे, तेनी विक्ति विचारीने जोय...

समागम संतनो.. १०

ज्ञानहीन गुरु नव कीजीए, वंध्या गाय सेवे शुं थाय...

समागम संतनो.. ११

कहे 'प्रीतम' ब्रह्मवेत्ता भेटतां, महारोग समूळो जाय...

समागम संतनो.. १२

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