BhaktiVed
ॐ

Santane Santapna Re Manva Nathi Maphatman Malta

Bhajan

संतने संतपणा रे मनवा नथी मफतमां मळता

संतने संतपणा रे मनवा नथी मफतमां मळता,

नथी मफतमां मळता रे एना मूल चूकववा पडतां.

संतने संतपणा रे...

भरी बजारे कोई वेचाणा. कोई तेल कडामां बळता (२)

काया कापी कांटे तोळी कोई हेमाळो गळता.

संतने संतपणा रे...

करवत मेली माथा वेर्याने काळजा कापीने धरता (२)

झेर पीधां ने जेलुं भोगवी साधुडा सुळीए चडता.

संतने संतपणा रे...

प्यारा पुत्रनुं मस्तक खांडीने भोग साधुने धरता (२)

घरनी नारी दानमां देतां, जेना दिल जरी नव डरता.

संतने संतपणा रे...

पर दुःखेरे जेनो आतम दुःखीयो रुदियो जेना रडतां (२)

मान मोहने ममता त्यागी जईने ब्रह्ममां भळता.

संतने संतपणा रे...

गुरु प्रतापे भणे पुरुषोतम जेना चोपडे नाम चडता (२)

एवा संतने भजता जीवडां भवना बंधन टळता.

संतने संतपणा रे...

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