BhaktiVed
ॐ

संतकृपा

भजनरचना: પ્રીતમ (Pritam)

पद ४२ धोळ ४ थुं.

संत कृपा छूटे माया, काया निर्मळ थाय जो,

श्वासो श्वाश समरण करतां, पांचे पातक जाय जो ने. संत०

केसरी केरे नादे नासे कोटी कुंजर जूथ जो ने,

हिंमत होय तो पोतेपाने सधळी वाते सूथ जो ने. संत०

अग्निने उधेई न लागे, महामणोइने मेल जो ने,

अपार सिंधु महाजळ ऊंडा, मर्मीने मन सहेल जो ने. संत०

बाजीगरनी बाजी ते तो जंबूरो सौ जाणे जो ने,

हरिनी माया बहु बळवंती, संत नजरमां नाणे जो ने. संत०

संत सेवतां सुकृत वाधे, सहेजे सीझे काज जो ने,

प्रीतमना स्वामीने भजतां, पामे अखंड राज जो ने. संत०

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