BhaktiVed
ॐ

वस्तु विचारीने दीजीए

భజనరచన: ગંગાસતી (Gangasati)

वस्तु विचारीने दीजीए

वस्तु विचारीने दीजीए

जोजो तमे सुपात्र रे,

वरसा सुधी अधिकारीपणुं जोवुं

ने फेर न रहे अणुमात्र रे ... वस्तु.

गुरुने क्रोध थयो एवुं लागी जाणे,

ने त्यां लगी शुद्ध अधिकारी न कहेवाय रे,

गुरुजीना वचनमां आनंद पामे

जे आवी लागे एने पाय रे ... वस्तु.

एवा शुद्ध अधिकारी जेने भाळो,

ने तेने करजो उपदेश रे,

गंगा रे सती एम बोलियां रे

एने वागे नहि कठण वचनो लेश रे ... वस्तु.

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