BhaktiVed
ॐ

लाभ ज लेवो होय तो

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/લાભ_જ_લેવો_હોય_તો (revision 199968)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

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लाभ ज लेवो होय तो

लाभ ज लेवो होय तो बेसोने एकांतमां

कूंची रे बतावुं अपार रे,

ए कूंचीथी ब्रह्मनां ताळां उघडे

ने लागे भजनमां एक तार रे .... लाभ ज लेवो होय तो

प्रथम मुख्य धारण राखो ने

दशाने राखो गंभीर रे,

नियम बारु बोलवुं नहीं ने

धारणा राखवी धीर रे .... लाभ ज लेवो होय तो

आहार तो सर्व सत्वगुणी करवो

ने रूडी पाळवी रीत रे,

गुरूजीना वचनने मूकवुं नहीं

ने राखवी परिपूर्ण प्रीत रे ... लाभ ज लेवो होय तो

खटमास एकांते आसन जीतवुं

त्यारे अर्धो योग थ्यो कहेवाय रे,

गंगा सती एम रे बोलिया

पछी अभ्यास वधतो जोने जाय रे .... लाभ ज लेवो होय तो

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