BhaktiVed
ॐ

लाग्यां शबदनां बाण

भजनरचना: રવિ સાહેબ (Ravi Saheb)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/લાગ્યાં_શબદનાં_બાણ (revision 206474)
स्रोत का विवरण
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लाग्यां शबदनां बाण

जेने वाग्या शबदना बाण रे,

जेना प्रेमे वींधायेला प्राण रे.

पतिव्रता जेना पियु परदेशे,

एनी केम झंपावुं झाळ रे ?

नाथ विना अमने निंद्रा न आवे,

सूता सेजलडी शूळी समान रे… जेने.

दीपक देखी ज्यारे मनडा लोभाणां,

त्यां पतंगे छोड्या एना प्राण रे,

आप पोतानुं ज्यारे अग्निमां होम्युं,

त्यारे पदवी पाम्यो ए निर्वाण रे… जेने.

चंद्र चकोरने प्रीत बंधाणी,

बंदा चांदो वहे आसमान रे,

देह उलटावे तोय द्रष्टि न पलटे,

जेनां नयणांमां घूरे ए निशान रे… जेने.

जळ शेवाळने प्रीत घणेरी बंदा,

मीन वसे जळ मांय रे,

सूका गया नीर त्यारे प्राण वछूट्या,

जो जो प्रीत कर्याना प्रमाण रे… जेने.

ऊडी गई रजनी ढळी गया तिमिर,

तोय न मट्यां अभिमान रे.

कहे रविदास सत भाण प्रतापे,

तोय न मट्यां अभिमान रे… जेने.

कहे रविदास सत भाण प्रतापे,

स्वप्नुं संसारियो जाण रे,

जेने वाग्या शबदना बाण रे,

जेना प्रेमे वींधायेला प्राण रे.

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