BhaktiVed
Krishna

Sanvriya Mhari Prit Nibhajyo Ji

BhajanAuthor: मीराबाई (Meera Bai)

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साँवरिया म्हारी प्रीत निभाज्यो जी।

थे छो म्हारा गुण रा सागर, औगुण म्हारा मत जाज्यो जी।

साँवरिया म्हारी प्रीत निभाज्यो जी।

लोकलाज कुल की मरजादा, सबरी तजी तुम्हें ध्याज्यो जी।

साँवरिया म्हारी प्रीत निभाज्यो जी।

जनम जनम की दासी थारी, चरण कँवल सूँ लगाज्यो जी।

साँवरिया म्हारी प्रीत निभाज्यो जी।

मीरा रा प्रभु गिरिधर नागर, भव पार उतराज्यो जी।

साँवरिया म्हारी प्रीत निभाज्यो जी।

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Source: Meera Bai pad; standard Meera Padavali text as commonly sung

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