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राम

अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी

भजनरचना: सन्त रविदास (Sant Ravidas)

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अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी।

प्रभु जी तुम चन्दन हम पानी, जाकी अँग अँग बास समानी।

प्रभु जी तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चन्द चकोरा॥

अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी।

प्रभु जी तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती।

प्रभु जी तुम मोती हम धागा, जैसे सोनहिं मिलत सुहागा॥

अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी।

प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करै रैदासा।

अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी॥

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स्रोत: Ravidas pad (Guru Granth Sahib, Raag Sorath); text as commonly sung

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