BhaktiVed
ॐ

संगत तेने शुं करे

भजनरचना: પ્રીતમ (Pritam)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/સંગત_તેને_શું_કરે (revision 206467)
स्रोत का विवरण
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संगत तेने शुं करे

संगत तेने शुं करे, जईने कुबुद्धिमां धरे कान. टेक

मरी कपूर बेउ भेगां रहेता रे, निरंतर करी एक वास;

तोय तीखाश एनी न टळी रे, एनी कुबुद्धिमां नाव्यो बरास. १

चंदन भेळो वींटीने रे'तो रे, रात दिवस भोयंग;

तोय कंठेथी विष न गयुं रे, एने न आवी शीतळता अंग. २

राणी ने दासी भेगा रहेतां रे, जमतां नित्य करी प्रीत;

तोय शाणी समजी नहि रे, एने न आवी राजकुळनी रीत. ३

मोटो खर एक बांधियो रे, राजतणी घोडशाळ;

बोली ठोली तो बदली नहि रे, चंदी खातो'तो हारोहार. ४

दादुर रहेतो तळावमां रे, नित्य कमळ सुपास;

कलबल करतो कीचमां रे, एने न आवी कमळनी सुवास. ५

पथ्थर रहेतो पाणीमां रे, ऊंडो करीने निवास;

प्रीतम कहे टांकणे तणखा झरे रे, एने न लाग्यो पाणीनो पास. ६

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