BhaktiVed
ॐ

सरळ चित्त राखीने निर्मळ रहेवुं

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/સરળ_ચિત્ત_રાખીને_નિર્મળ_રહેવું (revision 199994)
स्रोत का विवरण
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सरळ चित्त राखीने निर्मळ रहेवुं

सरळ चित्त राखीने निर्मळ रहेवुं

ने आणवुं नहीं अंतरमां अभिमान रे,

प्राणी मात्रमां समदृष्टि राखवी

ने अभ्यासे जीतवो अपान रे .... सरळ चित्त राखी

रज कर्मथी सदा दूर रहेवुं

ने कायम करवो अभ्यास रे,

पांचेय प्राणने एक घरे लाववां

ने शीखवो वचननो विश्वास रे .... सरळ चित्त राखी

डाबी इंगला ने जमणी पिंगला

ने राखवुं स्वरभेदमां ध्यान रे,

सूर्यमां खावुं ने चंद्रमां जळ पीवुं

ने कायम रहेवुं व्रतमान रे .... सरळ चित्त राखी

नाडी शुद्ध थयां पछी अभ्यास जागे

एम नक्की जाणवुं निरधार रे,

गंगासती एम रे बोलिया रे

खेल छे अगम अपार रे .... सरळ चित्त राखी

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