BhaktiVed
कृष्ण

मधुकर स्याम हमारे चोर

भजनरचना: सूरदास (Surdas)

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मधुकर स्याम हमारे चोर।

मन हरि लियो साँवरी सूरत, चितै नयन की कोर॥

पकरे हुते हृदय उर अन्तर, प्रेम प्रीति के जोर।

गये छुड़ाइ तोरि सब बन्धन, दै गये हँसनि अँकोर॥

मधुकर स्याम हमारे चोर।

सोवत हुती सखी अपने घर, उठि भागे चहुँ ओर।

सूर स्याम गहि राखे नाहीं, कोउ न लगायो सोर॥

मधुकर स्याम हमारे चोर।

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स्रोत: Surdas, Sursagar (Bhramargit); text as commonly sung

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