BhaktiVed
कृष्ण

ऊधो मन न भए दस बीस

भजनरचना: सूरदास (Surdas)

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ऊधो मन न भए दस बीस।

एक हुतो सो गयो स्याम सँग, को आराधै ईस॥

इन्द्री सिथिल भईं केसव बिनु, ज्यों देही बिनु सीस।

आसा लागि रहति तन स्वासा, जीवहिं कोटि बरीस॥

ऊधो मन न भए दस बीस।

तुम तौ सखा स्याम सुन्दर के, सकल जोग के ईस।

सूर हमारैं नंदनंदन बिनु, और नहीं जगदीस॥

ऊधो मन न भए दस बीस।

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स्रोत: Surdas, Sursagar (Bhramargit); text as commonly sung

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