BhaktiVed
माता

आ शो चतुराना चित्तनो चाळो रे

garbaरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/આ_શો_ચતુરાના_ચિત્તનો_ચાળો_રે (revision 183905)
स्रोत का विवरण
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आ शो चतुराना चित्तनो चाळो रे, एने कोई न्याळोरे. टेक.

ब्रह्माए नथी घडी भामिनी, ए तो आपे बनीने आवीरे,

त्रण लोकनुं तेज तारुणी, ए तो छबि छबिले बनावीरे. एने.

घड्युं घरेणुं एने रे हाथे, हाथे भरी छे चोळी रे;

साळुडे भात नारी कुंजरनी, कसुंबाना रंगमां बोळी रे. एने.

वास पुर्यो एणे वृन्दावन मां, गोवरधन थकी आवेरे;

ए नारीनी जात कोई जाणे, तेनो फेरो फावे रे. एने.

कहीए छीए पण कह्युं न माने, ए नारी नहीं गीधारी रे,

ब्रह्मा ईन्द्र शेष शारदा एना चरण तणा अधिकारी रे. एने.

अंतर हेत पोतानुं जाणी, ए तो आवे छे अंतरजामीरे.

व्यभिचार मूकी जुओ विचारी, एतो नरसैंताचो स्वामीरे. एने.

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