BhaktiVed
कृष्ण

आज मारां नयणां सफळ थयां

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
अक्षर आकार

स्रोत और संपादकीय समीक्षा · समीक्षा दर्ज नहीं है
स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/આજ_મારાં_નયણાં_સફળ_થયાં (revision 196164)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

उपलब्ध स्रोत और समीक्षा का विवरण यहाँ दिया जाता है। लिपि बदलना अनुवाद नहीं है। परंपराओं में पाठांतर हो सकते हैं।

पद ८ राग रामग्री.

आज मारां नेणांरे सफळ थयां, नाथ जोयां में नीरखी,

सुंदर वदन निहाळतां, मारा हृदयमां हरखी.— आज. १

जे मारा मनमां हतुं ते व्हालाजीए कीधुं;

प्रेमेथी प्रभुजी पधार्या, आलिंगन दीधुं.— आज. २

जोगीरे जंगमरे सेवडा, तेना स्वप्नमां न आवे;

भाग भलां व्रजनारनां, हरिने लाड लडावे— आज. ३

धन धन गोकुळ गामडुं धन धन व्रजनो वास;

धन धन आ भूमिने, ज्यां व्हालो रमिया छे रास.— आज. ५

अंतरीक्षथी दहु देवता, त्यां जोवाने आवे;

थाळ भर्यो सग मोतिये, नागर नरसी वधावे.— आज. ६

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें