BhaktiVed
ॐ

चक्षु बदलाणी ने

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
अक्षर आकार

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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/ચક્ષુ_બદલાણી_ને (revision 199936)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

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चक्षु बदलाणी ने

चक्षु बदलाणी ने सुवांत वरसी,

ने फळी गई पूरवनी प्रीत रे.

टळी गई अंतरनी आपदा,

ने पाळी सांगोपांग रूडी रीत रे ... चक्षु.

नाभिकमळमांथी पवन उलटाव्यो,

ने गयो पश्चिम दिशामांह्य रे,

सुस्ती चडी गई सूनमां,

ने चित्त मांही पुरूष भाळ्या त्यांय रे ... चक्षु.

अविगत अलख अखंड अविनाशी रे

अव्यकता पुरूष अविनाशी रे,

बाळीने सुरता एमां लय थई गई,

हवे मटी गयो जन्मनो भास रे ... चक्षु.

उपदेश मळी गयो

ने कराव्यो परिपूरण अभ्यास रे,

गंगा रे सती एम बोलियां

ने आव्यो परिपूरण विश्वास रे ... चक्षु.

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