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विट्ठल

माझे माहेर पंढरी

abhangरचना: संत एकनाथ (Sant Eknath)
लिपि
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माझे माहेर पंढरी, आहे भिवरेच्या तीरी।

बाप आणि आई, माझी विठ्ठल रखुमाई।

माझे माहेर पंढरी।

पुंडलिक राहे बंधु, त्याची ख्याती काय सांगू।

माझे माहेर पंढरी।

माझी बहीण चंद्रभागा, करितसे पाप भंगा।

माझे माहेर पंढरी।

एका जनार्दनी शरण, करी माहेरची आठवण।

माझे माहेर पंढरी।

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