BhaktiVed
माता

गोरी तारे त्राजूडे

garbaरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/ગોરી_તારે_ત્રાજૂડે (revision 183701)
स्रोत का विवरण
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मोह्या मोह्या मुनिवर राया रे; गोरी तारे ताजुडे रे,

रूप स्वरूप कळ्युं नव जाये, में तो जाणी छे कोई दीसे छे ईश्वरी माया रे; गोरी.

रूमझुम रूमझुम नेपूर बाजे, पावले ए चीर अति चांपे रे;

घुंघरमां मुख एणीपेर शोभे, मोटा मुनीजननां मन कांपेरे; गोरी.

गोरुं शुं वदन ने गळस्थळ झळके, उपर दामणी लळकेरे;

साळुडानी कोर एणीपेर शोभे जाणे गगनमां वीजळी चळकेरे; गोरी

वशीकरण वेण तमे क्यांरे गुंथावी, सुंदरी शणगट वाळी रे;

आ चोळी तमे क्यां शीवडावी, जेने मोही छे व्रजनी नारी रे ? गोरी.

चंचळ दृष्टे चोदेश न्याळे, मांहे मदननो चाळो रे;

नरसैंयाचो स्वामी जोवा सरिखडो, कोई ए सुंदरीनुं वदन निहाळोरे. गोरी.

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