BhaktiVed
ॐ

नहि ऐसो जनम बारंबार

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

राग देस या पूर्वी - तीन ताल

नहि ऐसो जनम बारंबार, ध्रुव०

क्या जानुं कछु पुन्य प्रकटे मानुसा अवतार.

बढत पल पल, घटत छिन छिन, जात न लागे बार;

बिरछके ज्यों पात टूटे, लागी नहि पुनि डार.

भवसागर अति जोर कहिये, विषम ओखी धार;

सुरतका नर बांधे बेडा, बेगि ऊतरे पार.

साधु संत महंत ग्यानी, चलत करत पुकार,

दासी मीरां लाल गिरिधर, जीवना दिन चार.

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