BhaktiVed
राम

गुपत रस आ जाणी लेजो

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/ગુપત_રસ_આ_જાણી_લેજો (revision 199935)
स्रोत का विवरण
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गुपत रस आ जाणी लेजो

गुपत रस आ जाणी लेजो पानबाई!

जेथी जाणवुं रहे नहि कांई,

ओघ रे आनंदना कायम रहे,

ने सेजे संशय बधा मटी जाय ... गुपत.

शुरवीर थैने संग्रामे चडवुं पानबाई,

मायलुं मन फरी ऊभुं न थाय;

केवळ भक्तिने तमे एम पामो पानबाई,

जेथी जनम मरण सहेजे मटी जाय ... गुपत.

परपंचनां तोडी नाखो पडल पानबाई,

तो तो पचरंगी पार जणाय;

जथारथ पदने जाण्या पछी पानबाई,

भाव कभाव मनमां नहि थाय ... गुपत.

मेदानमां हवे मामलो मचावो पानबाई,

भजन करो भरपूर,

गंगा रे सती एम बोलियां रे,

वरसावो निर्मळ नर ... गुपत.

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