BhaktiVed
कृष्ण

जीभलडी रे ! तने हरिगुण गातां

भजनरचना: પ્રીતમ (Pritam)
लिपि
अक्षर आकार

स्रोत और संपादकीय समीक्षा · समीक्षा दर्ज नहीं है
स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/જીભલડી_રે_!_તને_હરિગુણ_ગાતાં (revision 196498)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

उपलब्ध स्रोत और समीक्षा का विवरण यहाँ दिया जाता है। लिपि बदलना अनुवाद नहीं है। परंपराओं में पाठांतर हो सकते हैं।

परचुरण

जीभने शिखामण

पद १ राग प्रभात.

जीभलडी रे ! तने हरिगुण गातां आवडुं आळस क्यांथी रे !

लवरी करतां नवरी न मळे, बोली ऊठे सौमांथी रे !

परनिंदा करवाने पूरी, शूरी खटरस खावा रे;

झघडो करवा जाहेर झूझे, कायर हरिगुण गावा रे.

दव लाग्या पछी कूप खोदावे, आग एथी क्यां ओलवाशे रे?

चोरो तो धन हरी गया, पछी दीपकथी शुं थाशे रे?

तल मंगावो ने तुलसी मंगावो, रामनाम लेवरावो रे;

परथम तो मस्तक नहीं नमतुं, पछी नाम शुं संभळावो रे ?

रामनामनुं दाम न बेसे, काम खडे नहीं करवुं रे;

सहेजे पार पंथनो आवे, भजन थकी भव तरवुं रे.

जेनुं नाम जपे जोगेश्वर, शंकर शेष विरंचि रे;

कहे ‘प्रीतम’ प्रभु-नाम विसार्युं, ते प्राणी परपंची रे.

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें