BhaktiVed
ॐ

सुनता है गुरु ज्ञानी

భజనరచన: कबीर (Kabir)

ఈ పాఠం ఇంకా సరిచూడబడలేదు.

सुनता है गुरु ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी, गगन में आवाज़ हो रही झीनी झीनी।

पहले आए नाद बिन्दु से, पीछे जमया पानी।

सब घट पूरण पूर रह्या है, अलख पुरुष निरबानी॥

सुनता है गुरु ज्ञानी।

वहाँ से आया पटा लिखाया, तृष्णा तू ना जानी।

बिना खोजे अब ना ठिकाना, बूझ ले गुरु से बानी॥

सुनता है गुरु ज्ञानी।

जोगी ज्ञानी तपसी सबै तपसी, आपन आपन में भरमानी।

कहत कबीर सुनो भाई साधो, जिन सतगुरु बिन ना जानी॥

सुनता है गुरु ज्ञानी।

ఈ పాఠానికి వీడియో లేదు.YouTubeలో వెతకండి
మూలం: Kabir pad; text as commonly sung

ఇవి కూడా చదవండి