BhaktiVed
कृष्ण

खळखळतुं पाणी

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
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स्रोत का विवरण
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खळखळतुं पाणी

खळखळतुं पाणी ते अगनथी आकरुं, चोकमां लावीने मेल्युम आणी,

पोताना जाण तेने गण्या पारका, अन्य जाणी तीनी त्रीठ ताणी – खळखळतुं. १

माग्या महेते जई , वहेवाईने कही, उष्णमां भेळवा टाढुं पाणी,

‘गीत गाशो तंही मेहूलो वरसशे, आफणीये थाशे जळ समाणी. – खळखळतुं. २

कीधो मल्हार ते सांभळ्यो शामळे, थयो घनघोर ने धनुष्य ताण्युं,

वाय छे वावडो वीज चमका करे, गाजियो गगन ते जगते जाण्युं. - खळखळतुं ३

चातुर्मास नथी, नथी रत-मावठुं, कारमो उमग्यो खडक काढी,

अवनी उपर थई नीर चाल्युं वही, जाणीए मेह वूठ्यो अषाढी – खळखळतुं. ४

धाई वहेवाई आव्या महेताजी कने , ‘धनो महेता ! धन्य भक्ति साची,

पहेरामणी पण नरसै करशे भली, मूरख आपणी बुद्धि काची.’ – खळखळतुं. ५

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