BhaktiVed
कृष्ण

कोण पुन्ये करी

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/કોણ_પુન્યે_કરી (revision 182715)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

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कोण पुन्ये करी नार हुं अवतरी, श्रीहरि दीन थई मान मागे;

अमर अवगति कहे, अकल को नव लहे, ते कमलावर कंठ लागे.

यज्ञ यागे यजी योग ध्याने धरी, बहु व्रत आदरी देह कष्टे;

तोय ते श्रीहरी, स्वप्ने न पेखीए, ते हरी निरखीए प्रेम दृष्टे.

शेष सुखासन शेज सदा सही, भुवन जस्ं वैकुठ काहावे;

ते पें अधिक जे मंदीर माहरूं, प्रेमे पीतांबर पलंग आवे.

भगतवछलतणुं बिरद पोते वहे, वेद पुराण एम शास्त्र वाणी;

नरसिंहाचो स्वामी भलेरे मळियो, कीधी कृपा मुने दीन जाणी.

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