BhaktiVed
कृष्ण

महीडुं मथवाने ऊठ्या जशोदाराणी

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/મહીડું_મથવાને_ઊઠ્યા_જશોદારાણી (revision 207543)
स्रोत का विवरण
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महीडुं मथवाने ऊठ्या जशोदाराणी

महीडुं मथवाने ऊठ्या जशोदाराणी;

विसामो देवाने ऊठ्या सारंगपाणी. – महीडुं. १

माता रे जशोदा तारुं महीडुं वलोवुं;

बीशो मां माताजी ! गोळी नहीं फोडुं. – महीडुं.२

ध्रूजयो मेरु रे एने ध्रासको लाग्यो;

रवैयो करशे तो निश्चे हुं भाग्यो. – महीडुं. ३

वासुकि भणे; ‘मारी शी पेर थाशे ?

मारुं नेतरुं करशे तो जीवडो जाशे.’ – महीडुं. ४

रत्नाकर कहे; ‘मुज रतन नथी,

ठालो वलोवशे मुने गोकुळपति.’ – महीडुं. ५

ब्रह्मा इंद्रादिक वळतां लाग्या रे पाय;

‘नेतरू मूको तमे गोकुळा राय !’ – महीडुं. ६

जशोदाजी कहे; ‘हुं तो नवनिध पामी,

भक्तवत्सल मळ्यो नरसियानो स्वामी.’ – महीडुं. ७

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