BhaktiVed
ॐ

मन तुंही तुंही बोले रे

भजनरचना: ધીરો ભગત (Dhiro Bhagat)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/મન_તુંહી_તુંહી_બોલે_રે (revision 196139)
स्रोत का विवरण
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पद १५ राग एज.

मन तुंही तुंही बोले रे, आ सपना जेवुं मन तारुं;

अचानक ऊडी जाशे रे, जेम देवतामां दारू. मन. टेक.

झाकळजळ पळमां वळी जाशे, जेम कागळ ने पाणी;

कायावाडी तारी एम करमाशे, थई जाशे धूळधाणी;

पाछळथी पस्ताशे रे, मिथ्या करी मारुं मारुं. मन. १

काचनो कूंपो काया तमारी, वणसतां न लागे वार;

जीव कायाने सगाई केटली, मूकीचाले वनमोझार;

फोगट फूल्या फरवुं रे, ओचिंतुं थाशे अंधारुं. मन. २

जायुं तो ते तो सर्व जावानुं, ऊगरवानो उधारो;

देव, गांधर्व, राक्षस, ने माणस, स‌उने मरणनो मारो;

आशानो महेल ऊंचो रे, नीचुं आ काचुं कारभारुं. मन. ३

चंचळ चित्तमां चेतीने चालो, झालो हरिनुं नाम;

परमारथ जे हाथे ते साथे करी रहेवानो विश्राम;

धीरा धराधरथी रे, नथी कोई रहेनारुं. मन. ४

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