BhaktiVed
ॐ

मनडाने स्थिर करी आवो रे मेदानमां

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/મનડાને_સ્થિર_કરી_આવો_રે_મેદાનમાં (revision 199960)
स्रोत का विवरण
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मनडाने स्थिर करी आवो रे मेदानमां

मनडाने स्थिर करी आवो रे मेदानमां,

देखाडुं हरि केरो देश रे,

हरिनो देश तमने एवो देखाडुं,

ज्यां नहीं वर्ण ने नहीं वेश जी ... मनडाने.

सुक्ष्म सूवुं ने सुक्ष्म चालवुं

सुक्ष्म करवो वे'वार रे,

शरीरनी स्थिरतामां चित्त जेनुं कायम,

ने वृत्ति न डोले लगार जी ... मनडाने.

कुबुद्धिवाळानो संग नव करवो

रहेवुं एकांते असंग रे,

कूंची बतावुं एनो अभ्यास करवो,

नित्य रे चडाववो नवो रंग जी ... मनडाने.

चित्तने विषयमांथी खेंची लेवुं

रेवुं सदाय ईन्द्रिय-जीत रे,

गंगा सती एम बोलियां पानबाई,

तो विपरीत थाशे नहीं चित्त जी ... मनने.

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