BhaktiVed
शिव

मरम वचन कह्यां भाभीए

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/મરમ_વચન_કહ્યાં_ભાભીએ (revision 207550)
स्रोत का विवरण
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मरम वचन कह्यां भाभीए

मरम वचन ख्यां भाभीए हुंने ते, माहरा प्राणमां रह्या वळुंघी,

शिव आगळ जई. एकमनो थई, ध्यान कीधुं दिवस सात सुधी. - मरम. १

हरजीए हेत धरी, दीन जाणी करी, प्रगट दर्शन दीधुं शूलयाणि,

'तारी भक्ति उपर हुं ज प्रसन्न थयो, माग रे माग' मुख वदत वाणी. - मरम. २

गद् गद् कंठे हुं बोली शकुं नहीं, मस्तके कर धर्यो मुघ जाणी,

अचेत चेतन थयो, भव तणो अध गयो, सूती ऊठी मारी आद्य वाणी. - मरम. ३

'तमने जे वल्लभ होय कांई दुल्लभ आपो, प्रभुजी ! हुं ने दया रे आणी'

गोपीनाथे हुंने अभेपद आपियुं, नरसैयो हरिजश रह्यो वखाणी. - मरम. ४

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