BhaktiVed
कृष्ण

तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर

भजनरचना: मीराबाई (Meera Bai)

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तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर।

हम चितवत तुम चितवत नाहीं, हिय में बड़ो कठोर।

तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर।

मेरे आसा चितवनि तुम्हरी, और न दूजी ठौर।

तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर।

तुमसे हमको एक हैं जी, हम-सी लाख करोर।

तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर।

मीरा कहै प्रभु हरि अबिनासी, नैन बन्यो दोउ जोर।

तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर।

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स्रोत: Meera Bai pad; standard Meera Padavali text as commonly sung

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