BhaktiVed
कृष्ण

प्रातः हवुं प्राणपति

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/પ્રાતઃ_હવું_પ્રાણપતિ (revision 195432)
स्रोत का विवरण
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पद ३१ मुं – राग प्रभात

पा० "उठ आलस तजी, कानकी माहरा, सासु जशोदा सादे साहे."ललित स्वर सुंदरी, ललित आलापती घेर घेर दाध मथन घोष थाये;

दीपक ज्योत, झांखी थइ कहानजी, सुरभी सुपवन शीतर वाये. प्रात.

कमल विकासीयां, मधुप मध्य उडी गया, कुरकुटा बोले पीयु पाय लागुं.

सूर्य उग्या समे, लाजीए घर जतां, नरसैंचा स्वामी मान मागुं. प्रात.

प्रात हवो प्राणपती, ईंदु गयो आथमी, कां रहो बांहुडी कंठ घाली;

नाथ मुको बाथमांथी, मुजने वळगो नहीं, शुं करशो हजु हाथ झाली ? प्रात.

आ जुवो अरुण, पुरव दशा उगियो, तेज तारातणां क्षीण दीसे;

शब्द सोहामणा, सावजां ओचरे, वच्छ धेन घणुं घेर हीसे. प्रात. ललित स्वर सुंदरी, ललित आलापती घेर घेर दाध मथन घोष थाये;

दीपक ज्योत, झांखी थइ कहानजी, सुरभी सुपवन शीतर वाये. प्रात.

कमल विकासीयां, मधुप मध्य उडी गया, कुरकुटा बोले पीयु पाय लागुं.

सूर्य उग्या समे, लाजीए घर जतां, नरसैंचा स्वामी मान मागुं. प्रात.

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