BhaktiVed
ॐ

प्रेमलक्षणा भक्ति जेने प्रगटी

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)
लिपि
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स्रोत
Gujarati Wikisource, https://gu.wikisource.org/wiki/પ્રેમલક્ષણા_ભક્તિ_જેને_પ્રગટી (revision 199954)
स्रोत का विवरण
Text taken from the Wikisource transcription; script-converted to Devanagari

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प्रेमलक्षणा भक्ति जेने प्रगटी

प्रेमलक्षणा भक्ति जेने प्रगटी

तेने करवुं पडे नहीं कांई रे,

सदगुरु वचननी छाया पडी गई

तेने अढळक प्रेम उरमांय रे ... प्रेमलक्षणा

प्रेमलक्षणा भक्ति शबरीए कीधी ने

हरिए आरोग्यां एंठा बोर रे,

आवरण अंतरमां एके नहीं आव्युं ने

चाल्युं नहीं त्यां यमनुं जोर रे ... प्रेमलक्षणा

प्रेम प्रगट्यो विदुरनी नारी ने

भूली गई देह केरुं भान रे,

केळानी छालमां हरिने रीझव्यां ने

छूट्युं अंतरनुं एनुं मान रे ... प्रेमलक्षणा

एवो रे प्रेम जेने प्रगटियो,

ते स्हेजे हरिभेगो थाय रे,

गंगा सती एम बोलिया रे पानबाई,

तेथी यमराज दूर जाय रे ... प्रेमलक्षणा

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